आवर्त सरणी

आधुनिक आवर्त्त नियम - 

जब तत्वों को उनके बढ़ते हुई परमाणु क्रमांक के क्रम में जमाया जाता है, तब तत्वों के भौतिक व रासायनिक गुणों में आवर्तिता उनके परमाणुओं के सबसे बाहरी कोष में क्रमशः समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की पुनःरावृत्ति के फलस्वरूप होती है।  यह मोजले द्वारा दिया गया है। 

वर्ग तथा आवर्त्त - 

आवर्त्त सारणी के ऊर्ध्वाधर कॉलम में (Vertical XColumns) को वर्ग कहा जाता है।  मोटे तौर पर इनकी संख्या 9 I से VII वर्गो को A तथा B में यथोचित स्थान प्रदान किया गया है, जबकि VIII वर्ग में तत्वों को तीन-तीन के समूह में सजाया गया है। 

सारणी के एकदम अंत में जीरो वर्ग को स्थान प्रदान किया गया है।  जीरो (0) ग्रुप में अक्रिय या आदर्श गैसों को स्थान दिया गया है।  एक ही वर्ग के सभी तत्वों के बाह्र्यातम कोष में उपस्थित इलेक्ट्रोनोकी संख्या बराबर होती है।  ये इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन कहलाते है।  आवर्त सारणी में तत्वों की क्षैतिज पंक्तियाँ आवर्त्त कहलाती है।  इनकी कुल संख्या 7 है। 

परमाणु त्रिज्या - सामान्यतः किसी परमाणु की बाह्रयतम कक्षा और उसके नाभिकी के केंद्र के बीच की दूरी को परमाणु की त्रिज्या कहते है इसे आंग्स्ट्रॉम (A०) में व्यक्त किया जाता है। 

  • आधुनिक आवर्त नियम का आधार क्या है ?परमाणु क्रमांक 
  • 'त्रिक' नियम किसने दिया ? - डोबरीनार
  • अष्टक नियम किसने बनाया ? -न्यूलैंडस 
  • तत्वों का प्रथम आवर्त वर्गीकरण किसने किया था? रूसी वैज्ञानिक इवेनोविय मेंडलीफ, 1869
  • आवर्त सारणी का पहला संक्रमण कौनसा है ? - SC (स्कैंडियम)
  • आवर्त सारणी में सबसे अधिक यौगिक बनाने वाला तत्व कौनसा है ? - कार्बन 

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